रीतिकालीन महत्वपूर्ण काव्य पंक्तियाँ

 रीतिकालीन महत्वपूर्ण काव्य पंक्तियाँ



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1- " कुंदन को रंग फीको लगै , झलकै अति अंगिनी चारू गोराई "    

A- मतिराम

B- घनानंद 

C- बिहारीलाल 




2- "अति सूधो सनेह को मारग हैं जहॅ नैकु सयानप बाँक नहीं "

 A- घनानंद

 B- बोधा 

 C- आलम 





3- " साजि चतुरंग वीर रंग में तुरंग चढ़ि "        


A- भूषण

B- रामसहाय 

C- सेनापति 





4- " गुलगुली गिल में गलीचा है गुनीजन हैं 

"  A- पदमाकर 

B-मतिराम 

C- सूदन 





5- " आगे के कवि रीझि हैं तो कविताई  न तो , राधिका कन्हाई सुमिरन को बहानौ है " 

   A- भिखारीदास 

   B- चिन्तामणि

   C- देव 





6- " अमिय हलाहल मद भरे , सेत स्याम रतनार , जियत मरत झुकि - झुकि परत , जेहिं चितवत इक बार " 

 A- रसलीन 

 B- मतिराम 

 C- चिन्तामणि





7- " रावरे रूप की रीति अनूप , नयो - नयो लागत ज्यों - ज्यों निहारिये " 

  A- घनानंद

  B- बिहारी 

  C- रसलीन 





8- " भाषा प्रवीन सुछंद सदा रहै , सो घन जी के कवित्त बखानै " 

   A- ब्रजरत्नदास 

   B- देव 

   C- भूषण 



9- " नैन नचाय कही मुसकाय , लला फिर आइयो खेलन होरी "  

A- पदमाकर 

B- सुरति मिश्र 

C- मतिराम 





10- "काव्य की रीति सिखी सुकबीन सों देखी सुनी बहुलोक की बातें " 

  A- भिखारीदास 

  B- भूषण 

  C- बिहारी 




11- " पानी परात को हाथ छुओ नहिं नैनन के जल से पग धोए "   

A-  नरोत्तमदास 

B- केशवदास 

C- ब्रजरत्नदास






12- " अधर- मधुरता,  कठिनता - कुच , तीक्षनता - त्यौर ।

रस कवित्त परिपक्वता जाने रसिक न और " 

   A- भिखारीदास 

   B- घनानंद 

   C- मतिराम 





13- "  डेल सो बनाय आय मेलत सभा के बीच , लोगन कवित्त कीबो खेल करि जानो है। "         

A- ठाकुर 

B- कुलपति मिश्र 

C- भूषण





14- " जहाँ कलह तहँ सुख नहीं , कलह सुखन को सूल ।

सबै कलह इक राज में , राज कलह को मूल ।।"       

A- नागरीदास 

B- भिखारीदास 

C- बिहारीलाल 





15- " कौन परी यह बानि अरी नित नीर भरी गगरी ठरकावै।"  

A- प्रतापसाहि 

B- आलम 

C- श्रीपत 



16- " यह प्रेम को पंथ कराल महा तरवारि के धार पै धावनो है ।"    

A-  बोधा 

B- सेनापति 

C- ठाकुर 





17- चोजिन के चोजीमहा , मौजिन के महाराज हम कविराज हैं पै चाकर चतुर के " 

  A- ठाकुर 

  B- भूषण 

  C- सेनापति




18- " चाॅदनी के भारन दिखात उनयों सो चंद , गंध ही भारन बहत मंद- मंद पौन ।"

    A- द्विजदेव 

    B- घनानंद 

    C- मतिराम 




19- " लिखन बैठि जाकी सबी गहि- गहि गरब गरूर । भये न केते जगत के चतुर चितेरे कूर ।।"  





20- " सेवक सिपाही हम उन राजपूतन के , 

    दान जुध्द जुरिबे में नेक जे न मुरके ।" 

    A- कवि ठाकुर 

    B- बोधा 

    C- रसनिधि





21- " किंसुक - पुंज से फूलि रहे सु लगी उर दौ जु वियोग तिहारे " 

A- घनानंद 

B- बिहारी 

C- मतिराम







22- "हय रथ पालकी गयंद गृह ग्राम चारू, 

आखर लगाय लेत लाखन के सामा हौं ।"          A-पदमाकर

  B- घनानंद 

C- बिहारी 






23- " सावन आवन हेरि सखी  , मनभावन आवन चोन बिसेखी । " 

A-घनानंद 

B- बोधा 

C- बिहारी 





24- " सीख सिखाई न मानति है , बर ही बस संग सखीन के आवै ।"

A- प्रताप साहि

B- भूषण

C- मतिराम 






25- " पीर भरो जिय धीर धरै नहिं कैसे रहे जल जाल के बाँधे ।"





26- " मीनागढ़ बंबई सुमंद मंदराज बंग , 

  बंदर को बंद करि बंदर बसावैगो ।" 

  A- पदमाकर

  B- ठाकुर 

  C- रसनिधि 





27- " दृग उरझत टूटत कुटुम जुरत चतुर चित प्रीति। परति गाठ दुर्जन हिये दई नई यह रीति।"

A-बिहारी 

B- भूषण

C- मतिराम 




28- तंत्रीनाद कवित्त रस , सरस राग रति रंग , अनबूड़े बूड़े तिरे , जे बूड़े सब अंग ।"        A- बिहारी

B-घनानंद

C-आलम 






29- " अविधा उत्तम काव्य है , मध्य लक्षणा लीन । अधम व्यंजना रस विरस , उलटी कहत नवीन ।।"       

A- देव 

B- भिखारीदास 

C- बिहरी 




30- " नहिं पराग नहिं मधुर मधु , नहिं विकास यहि काल ।"     

A-  बिहारी 

B- मतिराम 

C- रसलीन 





31- " इंद्र जिमि जंभ पर , बाड़व सु अंभ पर , रावन सदंभ पर रघुकुल राज हैं ।" 

     A- भूषण

     B- भिखारीदास 

     C- कुलपति मिश्र 




32- " शिवा को बखानौं कि बखानौं छत्रशाल को ।"   

A- भूषण 

B- छत्रपति शिवाजी

C-सेनापति




33- " अमिय हलाहल मद भरे , सेत स्याम रतनार । जियत मरत झुकि - झुकि परत,  जेहि चितवत इक बार ।"    

A- रसलीन 

B-भूषण 

C- घनानंद 



35- " भूषन भूषित दूषन हीन प्रवीन महारस मैं छबि छाई ।"       

A- तोषनिधि 

B- भूषण 

C- सेनापति

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